ADARSHPANDEY 30 Mar 2023 शायरी समाजिक #writeradarshpandey #shayri #bestshayri #writeradarshpandeykishayri #googleshyari 114174 0 Hindi :: हिंदी
मेरी माँ के आँगन से , ये शहर छोटा लगता है। मेरी माँ के दीपक से, ये सूरज फीका लगता है।। हम लाख कमा ले दुनिया में ,मनचाही दौलत। पर माँ के हाथ मिले पैसों के आगे सब बौना लगता है।। माँ के हाथों से मिल जाती है तकदीर की सब लकीरें पर माँ का हाथ छूट रहा है, अब तो ऐसा लगता है। इतना गंभीर पाप भला कौन सा बेटा करता होगा । की माँ को आश्रम भेजकर,खुद घर मे रहता होगा लेखक आदर्श पाण्डेय