Mukesh Namdev 26 Aug 2023 शायरी धार्मिक कर्मयुद्ध,रण भूमि,लहू-लुहान,आगाज 55606 0 Hindi :: हिंदी
"कर्मयुद्ध"
"अभी भी जान बाकी है,थोड़ी- सी फिर से रण भूमि में उतरेंगें,
युद्ध का आगाज करेगें,ललकारेगें दुश्मन को लहू-लुहान करेंगे,
बस इसबार अंदाज और हथियार नये होंगे,पर रण भूमि वही होगी,
और इस कर्मयुद्ध में अपने लहू से,अपने इतिहास का आगाज करेंगें"
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