MD SHAYEED ALAM 21 Dec 2025 शायरी समाजिक शायरी मोहम्मद सईद आलम 9776 0 Hindi :: हिंदी
कब तक आजमाएगा हमें यह सन्ग दिल जमाना, हमें आता है इसे कैसे है झुकाना। अभी बढ़ाना है हमें अपने मेहनत का पैमाना, बेशक इसके लिए क्यों ना पड़े हमें नींद और चैन गवाना। अपनी मेहनत के बल पर ही हमें सबसे आगे है जाना।।