मोती लाल साहु 27 May 2023 शायरी समाजिक जब इंसान में अपनी कामयाबी- पर ग़ुरूर आ जाता है, उसे रिश्तो की अहमियत- नज़र नहीं आती- शिष्टाचार- व्यवहार से- अभिमानी का क्या नाता और वह समय प्रारब्ध- अकेला रह जाता है। 50778 0 Hindi :: हिंदी
जब इंसान में- अपनी कामयाबी, पर ग़ुरुर आ जाता है.... उसे रिश्तों की- अहमियत नज़र नहीं आती,, शिष्टाचार,व्यवहार से- अभिमानी का क्या नाता,, और वह समय- प्रारब्ध अकेला रह जाता है....!!!! -मोती