ASHWANI PANDEY ( ADVOCATE ) 30 Mar 2023 शायरी प्यार-महोब्बत आदत 101520 0 Hindi :: हिंदी
चलो ये इश्क़ नहीं चाहने की आदत है कि क्या करें हमें दू्सरे की आदत है तू अपनी शीशा-गरी का हुनर न कर ज़ाया मैं आईना हूँ मुझे टूटने की आदत है मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँ नहीं आता मैं क्या करूँ के तुझे देखने की आदत है तेरे नसीब में ऐ दिल सदा की महरूमी न वो सख़ी न तुझे माँगने की आदत है विसाल में भी वो ही है फ़िराक़ का आलम कि उसको नींद मुझे रत-जगे की आदत है ये मुश्क़िलें हों तो कैसे रास्ते तय हों मैं ना-सुबूर उसे सोचने की आदत है ये ख़ुद-अज़ियती कब तक “Ashu” तू भी उसे न याद कर कि जिसे भूलने की आदत है
1.MA (GEOGRAPHY) 2.UGC/NTA/NET (QUALIFIED) 3.UPSC/UPPCS (PREPRATION) 4.UPSC( INTERVIEW)2 TIMES ...