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"तुम एक एहसास की- तरह मेरे दिल में बसी है"! "तुम्हारी याद- यहीं मेरे ज़ीने का सबब है"! "इस जहां में खोई- कहां ये दिल दिवाना ढूंढे तुझे"!! "� read more >>
Introduction: In recent years, concerns about the erosion of morality in society have grown, leading to a deeper examination of the factors contributing to this decline and potential solutions to address the issue. In this article, we will explore the reasons behind the lack of morality in society and propose some solutions to help restore a mor read more >>
In an era marked by rapid technological advancements, cultural diversity, and changing social norms, the question of morality has become a critical concern. The erosion of morality in society can be attributed to various factors, and addressing these issues requires a multifaceted approach. In this article, we will explore the reasons behind the la read more >>
( मुखड़ा) जब-जब अत्याचार बढा है धरती माँ अकुलाई, जन्में हैं कृष्ण कन्हाई- जन्में हैं कृष्ण कन्हाई । ( अंतरा-1) राजा रोवे रानी रोवे, र read more >>
अलविदा अलविदा - अलविदा में तुम्हें कहके जाता हूँ अलविदा चाहता था मैं कुछ करने को लेकिन में नहीं कर सका मेरे ये भाग्य में न था करने को � read more >>
हौसला कमे कभी भी न, रगों में तूफानों की बिजली हो। आँखों में हसरतों की हो बरसात, कामयाबी का अपना भी हो इतिहास। एक दिन हम भी होंगें राजा, read more >>
"ये मीठी-मीठी- तरंग उठती है मेरे दिल में"! "ये तेरी एहसास- नैन मिलते ही मेरे दिल में"! "ये नाता है जन्मों- जन्मों का मेरा तुम्हारा लगता है read more >>
खवाबों को पुरा करना हे तो खुद को प्रबल करना होगा। एक अनछुआ-सा अहसास हे जो मन में उसे छूना होगा। देखा जो तुने कोई सपना रख उम्मीद कभी तो read more >>
"ये करीबियां- अब अपनों से भी, अपना लगने लगी है"! "ये करीबियां- बेज़ार ज़िंदगी, में आशा ला रही है"! "ये खिलने- लगी है एक ज़िंदगी, मुरझाने read more >>
मैं और मेरी तनहाई मेरे साथ रहती है भीड़ से कोसों दूर मेरी दुनियां बसती है दर्द में अकेले ही रो लेती हूं होठों को कभी -कभी गीतों से सजात read more >>
हर ख्वाहिश मेरी अधूरी ही रह गई जो सोचा था वह दिल में दब कर रह गई कितने अरमान , कितने सपने दिल में लिए हुए थी जाने कहां कौन से मोड़ पर आई� read more >>
अंग्रेजों की सब सहनी थी, आजादी कितनी मंहगी थी। जरा याद करो उन वीरों को जो देश की खातिर मरते थे, देश की आजादी खातिर छु read more >>
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