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रोके रुके न नीर नयन से ,राम चले जब छोड़ भवन से जड़ चेतन हो शून्य चले थे,कुछ कहे कौन हो मूक बने थे दु:ख को सहे जब दे विधाता,यहां तो मैं ही थी read more >>
हमें सीढ़ियों की ऊंचाई से मत गिराओ,हम फिर चढ़ जायेंगे, किसी को गिराना नहीं, उठाना सीखों जिंदगी में कुछ कर जाओगे। चंचल चौहान मंझ� read more >>
खिलखिलाती चेहरे से बेहतर कुछ और नहीं होती, मेहनत करनी वालों की कभी हार नहीं होती। read more >>
कोशिश तो बहुत की भुलाने की तुझे, मौखिक रूप से तो यह बातें, दृढ़ता से कबूल कर ली थी मैंने, मगर तुझको भुलाने में हम खुद को ही भूल जाने ल� read more >>
कभी खुशियां कभी है ग़म । अजब है प्यार का मौसम। कितने खुशनसीब थे बो पल । जब मिले थे तुम और हम।।। read more >>
रास्ते तो लोग बता सकते है लेकिन मंजिल तुम्हे खुद की मेहनत और जुनून से ही मिलेगी..... read more >>
# कोरोना काल में मेरी समसामयिक रचना "क्षणिकाएं" (१) पौ फटते ही , लॉकडाउन लगते ही , बंद हो गई भट्टी शराब की । बेवड़ों के लिए read more >>
क्या जरूरी है आज के जमाने में क्या जरूरी है किसकी सुना जाए खुद की या दुनिया वालो की खुद की करू तो दुनियां धिक्कारे और दुनियां की सूनू read more >>
सारा सुकून छीन लिया एक औरत का सरा सुकून छीन लिया जो कभी एक काम ना करती आज दिन भर काम कर के भी ताने खाती जो मां बाप के घर लाडो से पली आज व� read more >>
सच्चाई की कलम,हक की रौशनाई बनेगा है कोई जो दावत देगा,खुदा का दाई बनेगा इबादत करने वाले लोग फिरदौस मे जाऐंगे बेनमाजी मौत के बाद कब्र क� read more >>
खुश्क लबों की प्यास ही रहूंगा आस हूँ मै और आस ही रहूंगा मुझे कोई दुख नही है यार मगर आदतन मायूस उदास ही रहूंगा जमाना चाहें तेरे लियें � read more >>
जिक्र जब गमों का हो तो अपने लबों को खामोश रखना, क्यूंकि यहां लोग मदद कम तमाशा ज्यादा करते हैं......... read more >>
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