Sattya Sharma 05 Oct 2026 कविताएँ समाजिक Sahity.com 3027 0 Hindi :: हिंदी
कुछ बातें बचपन से जवानी तक कुछ सुनलों और कुछ सीख के रख सुबह जाते और शाम को वापस आते है कुछ से बाते तो कईयों को भूल जाते है उलझ गई है जिंदगी हमारी इस जमाने में अभी भी कट रहा है समय तुम्हे ये बताने में दिखाबा मत करो अपनी हैसियत दिखने में बस उम्र गुजर रही है अपनों के लिए कमाने में गुजर रही जिंदगी बस यही दुनिया का दस्तूर है हम लड़के है मुसाफिर बस यही हमारा कसूर है