Shubhashini singh 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य Google /Yahoo/Bing /instagram/Facebook/twitter 67094 0 Hindi :: हिंदी
ज़िन्दगी की कली वक़्त के साथ बदलती गई ज़िन्दगी की कली कभी नरम सी तो कभी गरम सी कभी खिली हुई तो कभी मुरझाई हुई कभी टूटी हुई तो कभी तोड़ी हुई हर हाल को सहती हुई ये वक़्त के साथ बदलती हुई ज़िन्दगी की कली....