Anilkumar Rathwa (Sameer) 29 Sep 2025 कविताएँ समाजिक "युवा और सही राह" 24701 0 Hindi :: हिंदी
आज का युवा भटक गया है, दिखावे की भीड़ में उलझ गया है। सोशल मीडिया की नकली चमक, सच्चे रिश्तों को कर रही ध्वस्त। न उसे धर्म का असली ज्ञान है, न जीवन का कोई उद्देश्य महान है। ना ग्रंथों को पढ़ने का समय है, ना सत्संग में बैठने का नियम है। भगवान को उसने भुला दिया, अपनी आत्मा से रिश्ता तोड़ दिया। माया की दौड़ में भागते-भागते, स्वयं की पहचान ही खो दिया। पर अभी भी अंधेरा स्थायी नहीं, हर रात के बाद सुबह होती यहीं। युवा यदि फिर से खुद को पहचाने, सत्य की ज्योति मन में जलाए। ज्ञान के दीप को हाथ में थामे, धर्म और विज्ञान दोनों अपनाए। माता–पिता का मान बढ़ाए, गुरुओं का आदर सिर झुकाए। प्रकृति से प्रेम, समाज की सेवा, यही है जीवन की सच्ची मेवा। युवा यदि चरित्र को आधार बनाए, संस्कार और ईमान को जगमगाए। भक्ति और शक्ति का संगम बने, तो फिर से भारत विश्व का अग्रगण्य बने।