Shiwani vishwakarma 02 Jun 2023 कविताएँ समाजिक वक्त,समय, बदलाव, सबर 36858 0 Hindi :: हिंदी
"कहते हैं ना कि वक्त भी बदलेंगे और जज्बात भी बदलेंगे,
पर तू खुद को बदल पूरी कायनात भी बदलेंगे,
रात हुई है तो इसका क्या मतलब,
सुबह नहीं होगा,
सबर तो कर,
इस आसियान के नजारे भी बदलेंगे।"
SIVI_VISH