मोती लाल साहु 22 May 2023 कविताएँ समाजिक यह उम्र और ज़िंदगी का तक़ाज़ा देखो, अपनें किनारा कर लें- अपने को- समझ लो उम्र हो गई- इससे पहले जो था वह जिंदगी गुजार ली तुमने- सिर्फ वक्त को अब गुजर जाने दो। 24618 0 Hindi :: हिंदी
यह उम्र और- ज़िंदगी का तक़ाज़ा देखो अपनें किनारा- कर लें अपने को, समझा लो उम्र हो गई इससे पहले जो था- वह ज़िंदगी गुज़ार ली तुमने सिर्फ़ वक्त को- अब गुज़र जाने दो यह उम्र और- ज़िंदगी का तक़ाज़ा देखो -मोती