Ritvik Singh 30 Mar 2023 कविताएँ दुःखद Google yahoo bing amar ujala 71466 0 Hindi :: हिंदी
तुम ज़ो अब यूँ किसी की बाँहों में आये हो
कभी चाँद को एक टक देखना
तो कभी तारों से मुँह मोड़ना
कभी तुम्हें भुलाने की कोशिश
तों कभी थोड़ा प्यार जताने की कोशिश
कभी काग़ज़ और क़लम से बातें करना
तो कभी तुमसे सपनों में चाहतें करना
कभी तुमसे अपनी बातें छिपायें रखना
तों कभी उदासीं को दोस्त बनाए रखना
कभी तुम्हारी चीजों को दिल से लगाये रखना
तों कभी तुम्हारी छोटी-छोटी सी ख़्वाहिश याद रखना
कभी बँज़र ज़मीन पर चली यें लूँ हवायें
तों कभी चहरे से छूटी यें फ़िज़ाएँ
क्यूँ तुम मेरी राहों में आये हों
तुम ज़ो अब यूँ किसी की बाँहों में आये हो