Bholenath sharma 14 Feb 2024 कविताएँ समाजिक तुम हो श्रेष्ठ 37706 0 Hindi :: हिंदी
तुम ही हो इसके लिए प्रशस्त
और अन्य नहीं जग में
हे कौन जो तुमको
रोक सके डग मैं ।
तेरे पथ में ही
आलस बाधा है।
तुमने नहीं जो
मन को साधा है।