akhilesh Shrivastava 24 Feb 2026 कविताएँ समाजिक समाज में समाप्त हो रहे रिश्ते एवं संस्कार तथा रीति रिवाज 12985 0 Hindi :: हिंदी
*कविता* 21-फरवरी 26
*दफ़न रिश्ते*
एक रात सपनों के
संसार में ख़ो गया मैं
यादों के समन्दर की
गहराई में डूब गया मैं।।
पुरानी यादों का भंडार
मुझे दिख रहा था
बचपन का सुनहरा
संसार बिखरा हुआ था ।।
छोटे छोटे कच्चे घरों में
परिवारों को खुशी खूशी
मिलजुलकर एक साथ
प्यार से रहते देखा मैंने।
माता पिता भाई बहिन को
कम पैसों में आनंद से
संयुक्त परिवारों के साथ
रहते हुए देखा मैंने।।
हरे भरे खेत खलिहान
बैलगाड़ी एवं कच्चे रास्ते
आमों की अमराई में
गांव की चौपाल को देखा मैंने
सादे सूती कपड़ों -लिबासों में
गैस बत्ती, लालटेन की रोशनी में
सादगी से समारोह और उत्सवों
को मनाते देखा मैंने
मां के हाथों की रसोई
चूल्हे पर बनी रोटी
हांडी पर बना दाल भात
सब्जी कढ़ी को देखा मैंने।
छोटे छोटे घरों में रहकर
प्यार से सभी रिश्तों को
खुशी से निभाकर रहते
हुए देखा मैंने।
समाज में सभी परिवारों को
प्यार से रहते हुए देखा मैंने
सुख दुःख में साथ निभाते
हुए देखा मैंने ।
समय की इस रफ्तार में
आधुनिकता की आंधी में
प्रेम प्यार के रिश्तों को
धूल धूसित होते देखा मैंने।।।
घमंड,दिखावा अहंकार
के झूठे आवरण में
उलझे लोगों को अपनों से
दूर होते हुए देखा मैंने।।
मन बड़ा विचलित हो गया
मैं पुरानी यादों में खो गया
जब दफन हुए रिश्तों की
सिसकियों को सुना मैंने।।
अब ईश्वर से यही प्रार्थना है
कि इन बेजान रिश्तों में
फिर से प्यार बढ़ जाए
मुझे मेरा अतीत नजर आये।।।
रचियता --अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जयनगर जबलपुर
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...