norika bankar 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य google 57338 0 Hindi :: हिंदी
तेरी मंजिल तुज़से दुर नही।
हे राही चलते- चलते तु क्यू रुक गया
मंज़िल तो तेरी यह नही
समय को कोसना दुर कर
तेरी मंज़िल तुज़से दुर नही।
भीड़ भरी रहो में अपने ,
सटीक रख रास्ते ,
औरो से नही तु खुद से
रख वास्ते ,
सफलता के में राहो तेरी
आँखे ओझल नही ,
तेरी मंज़िल तुज़से दुर नही।
चल माना तेरी राहो में ,
घोर है अंधेरा ,
तु अपने प्रकाश से कर
अपनी रहो में सवेरा
फर्क करना जानले गलत या सही ,
तेरी मंज़िल तुज़से दुर नही।
हर राहगीर का होता है
एक मुकाम ,
औरो के लिए नही
तु खुद के लिए कर काम ,
विचारो के रास्तो से
लिखती नोरिका कविता सही ,
तेरी मंज़िल तुज़से दुर नही।
-नोरिका बनकर