Bholenath sharma 17 Feb 2024 कविताएँ समाजिक तेरे द्वार प्रिय 39073 0 Hindi :: हिंदी
शाम बिताते यहीं पर
तेरे द्वार प्रिय मधुशाला ,
तुम दूर कहाँ हो सकते
मेरी प्रिय मधुशाला ।
श्रम करते आते है
फिर करते है विश्राम
तनिक मात्र पीते ही
मिट जाती है हर पीड़ा हर गम ।