Nisha Kumari 24 Jun 2026 कविताएँ समाजिक खुद को समझ, स्वयं को पहचान 4109 0 Hindi :: हिंदी
क्या खोया क्या है पाया जमाने ने यही गिनवाया आते हैं सब लोग अकेले ही फिर भीड़ में चलना क्यों सिखाया।। अपनी पहचान अपना अस्तित्व मिटे नहीं कभी न होता कभी विराम खुद में ही हो तुम संपूर्ण खुद को समझ, स्वयं को पहचान।। अपनी शक्ति अपना सम्मान जिनसे होती तुम्हारी पहचान कदर करो उनकी जो देते तुम्हे है मान कायम कर तू भी कहीं अपना मकाम।। यू ही नहीं मिल जाता है सबकुछ कुछ तो कर जो मिले फतह हो पूरा तेरा ये आसमान खुद को समझ, स्वयं को पहचान।।