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स्वयं को ईश्वरीय ज्ञान से जोड़ो।

शरद भूषण मोंगरा 09 Jun 2026 कविताएँ धार्मिक आत्मज्ञान 119 0 Hindi :: हिंदी

"खुद में बुद्ध जगाना है"
नहीं देखना धाम बाहर का खुद में बुद्ध जगाना है 
जीवन को उस पार ले जाए ऐसा ज्ञान अपनाना है
ईश्वर अल्लाह गुरु,कश्चियन ये सब धर्म बाहर के हैं 
देवी देव और पीर फ़कीर ये भी नाम बाहर के हैं 
जिसने पैदा किया हमें रूह का वह नूर जगाना है।
आज तोड़ दी सारी बेड़ी देह के झूठे प्रपंचों की
मिथ्या सारी बातें लगती बाहर के सरपंचों की 
जहां चढ़े है रूह गगन में नाद गूंजता शंखों का
नाम सुमिर धुर धाम उड़े जा काम नहीं है पंखों का
मरने वाली देह को भैया अब नहीं रोज सजना है
छोड़ दे झूठे आडम्बर, मालिक तुझे रोज बुलाता है 
राग रागिनी और दमामे तेरे लिए बजाता है
उठ जा भीतर चल दे प्यारे, संत चले गए चिल्ला कर।
गफलत वाली नींद छोड़ दे, काल पड़ेगा झल्ला कर।
भीतर सच्ची श्रद्धा लेकर, मलिक का द्वारा बजाना है।
खोल दिए गर पट तुम्हारे, भीतर धरा खजाना है।
शरद भूषण मोंगरा

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