Abhinav chaturvedi 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक Abhinav chaturvedi 44667 0 Hindi :: हिंदी
शिक्षकों का हरदम मान-सम्मान “बना” रहे, जो दिए हैं ज्ञान, वो सदा ज्ञान “जगा” रहे। हाशिल करें उपलब्धियाँ, उन्हीं ज्ञान की “पर्तों” से, सदा आदर करते रहें हम शिक्षकों का, ज्ञान और सह-सम्मान की “शर्तों” से। शिक्षकों का दिया हुआ, अपने अंदर हर पाठ और “प्यार भर लें तो”। सफ़लता चूमेगी हमारी कदम,उनके पद्चिन्हों पर अगर और क़दम दो-चार “चल लें तो”। कुछ तो लोग कहते हैं, शिक्षक बच्चों के लिए हरदम तत्पर रहते हैं। और सोचने समझने वाली बात है, ये बातें वे अक्सर करते हैं। कुछ लोगो में भरी युहीं नादानी है, हम बच्चों के ज़िन्दगी से जुड़ी कई शिक्षकों की कहानी है; इनके आदर्शों की कहानी हम बच्चों के ज़ुबानी है; आज भी कई लोग कहते हैं-शिक्षकों की कोई निशानी नहीं होती― उभरते ज्ञान की चिंगारी को जो देकर हवा-बनादे मशाल वही शिक्षक की निशानी है। शिक्षक तो खास होते हैं, शिक्षक भविष्य के हमारे आस होते हैं, कोरे कल्पनाओ में कुछ ज्ञान जुड़ा है। बेरंग ज़िन्दगी है, जो चढ़ा है वो भी रंग धुला है। विश्वास कीजिये, आदर-मान कीजिये, शिक्षकों के बिना ये जीवन सचमुच अधूरा है।