Rambriksh Bahadurpuri 22 Dec 2024 कविताएँ अन्य #Rambriksh Bahadurpuri kavi #Ambedkarnagar poetry #Sawan per kavita 48684 0 Hindi :: हिंदी
सावन आया नयी चेतना नयी जाग्रत अंतर्मन में नया भाव कुछ मन को भाया, गूॅंज उठे स्वर झूॅंम उठे वन प्रकृति ने भी नव मधुरस का पान कराया, लतिकाएं तरु आलिंगन कर लिपट लिपट कर नतमस्तक साभार जताया, रिमझिम रिमझिम बूॅंदें जल की छोड़ गगन को उतर धरा पर उपवन का संसार बसाया, स्पर्श प्रेम का अंतर् उर में मंद हवा बह प्रितम का रति भाव जगाया, नहीं प्रिय फिर और कौन वह? उच्छवास उर स्पंदन में और नहीं वह सावन आया। रचनाकार रामबृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...