Sudha Chaudhary 03 Jul 2024 कविताएँ अन्य संसार, बाधाओं 28384 0 Hindi :: हिंदी
संसार की दुश्चिंताओं को क्यों तोड़ रही आशाओं को खुल कर जीने का दंभ है मेरा फिर अकुलाहट क्यों बाधाओं को। ये समर मेरा अपना है रूक कर कुछ दूर ही चलना है अभी तो सूचक है दिन भी किस भांति मुझे निकलना है। सुधा चौधरी