Monu kumar 15 Jul 2026 कविताएँ समाजिक HARD WORK 150 0 Hindi :: हिंदी
# **बिन लड़े, बिन मरे** बिन लड़े, बिन मरे, हार कैसे मान लें? योद्धा हैं हम, वीर हैं हम, हार कैसे मान लें? बिन लड़े, बिन मरे, युद्ध से भाग कैसे जाएँ? अभिमन्यु की भाँति, अकेले खड़े हैं युद्ध में। बिन लड़े, बिन मरे, हार कैसे मान लें? चाणक्य की नीति पढ़कर, खड़े हैं इस मैदान में। ईरान से सीखा है, हार नहीं मानना। बिन लड़े, बिन मरे, हार कैसे मान लें? चीन से सीखा है, दुश्मन को निगलना। अशोक से सीखा है, धरती को जीतना। बिन लड़े, बिन मरे, हार कैसे मान लें।