Rajnish khandal 05 Apr 2025 कविताएँ समाजिक संगठन 27961 0 Hindi :: हिंदी
दूर राहो पर चलता वो राही,
एक - अकेला थकाता होगा।
एक से ग्यारह हम हो जाये तो,
रास्ता बड़ा ही सुंदर होगा.
कदम मिलाएं चलना होगा अब,
पदचिन्ह बढा़ये चलना होगा।
जब बाधाएं तुम पे भारी होगी,
बोझ बड़ी बिमारी होगी।
तुम्हरी आँखें गिरता देख के तुम को,
उस बाजी को हारी होगी।
तब कदम मिलाएं चलना होगा,
पदचिन्ह बढ़ाएं चलना होगा।
जब घोर - घटाएं छा जायेगी,
रस्ते मे ही बारिश आ जायेगी।
जब गिंदगी युद्धो तक जाएगी।
तलवारे शीशों तक आएगी।
तब कदम मिलाएं चलना होगा,
पदचिन्ह बढ़ाएं चलना होगा।
सब कुछ सोफकर ना कुछ माँगते,
इतना शीतल बनना होगा।
कांटो - कटारो से सजी हो जो,
उन रहो को अब चुनना होगा।
अब कदम मिलाएं चलना होगा,
पदचिन्ह बढ़ाएं चलना होगा।
भारत जैसे अखण्ड - खण्ड का,
हर शीश जुटाएं चलना होगा।
मातृभूमि पर मर मिट जाए,
ऐसा विचार घड़ाए चलना होगा।
अब कदम मिलाएं चलना होगा,
पदचिन्ह बढाएं चलना होगा।
~ रजनीश खाण्डल