नितिश सरोज पाण्डेय 11 Feb 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत 21604 0 Hindi :: हिंदी
असीम सागर सी भावनाओं के संग बहकर जाने कहाँ आ पहुंचा हूँ दूर तलक बस खालीपन वीराना है और फैला है हर ओर घना अँधेरा यूँ तो चला था मैं कारवां के संग साझा करता हुआ अपना सफ़र घिसटते कदमो से पिछड़ रहा था मैं और आगे ही आगे कारवां जाता रहा तुमने थाम लिया होता तो शायद शरीक-ए-सफ़र होता मैं अब तक तुमने छोड़ दिया देखो कहाँ आ रुका हूँ मैं