हुकम चन्द जैन 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक मां के घर से पहले सावन में बेटी की विदाई 81147 0 Hindi :: हिंदी
सावन बीता थम गए सेरे
गरजे बादल भादो बरसे
गौरी गई ससुराल पिया संग
डालन से खुल गए झूले |
अब सुनी गलियन कौन निहारे
बरखा में सब बंद है द्वारे
मात -तात की गई दुलारी
अखियां सूनी और मन भारी |
बाग है सूने नहीं है सखियां
नहीं ठिठोली और वो बतियां
एक दूजे से पूछे मन की
कैसी बीती बिरह की रतियॉ |
कैसे कहे किसे बताएं
रात जागरण उठे सवेरे
सावन बीता थम गए सेरे |
सहे विरह के पल अब बीते
पल अब नहीं हमारे रीते
साजन का प्यार भरा मनुहार
जिसके लिए हम थे तरसे
सावन बीता थम गए सेरे |
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