MD SHAYEED ALAM 04 Nov 2025 कविताएँ समाजिक कविताएं मोहम्मद सईद आलम 14435 0 Hindi :: हिंदी
पिता कभी प्यार जताता नहीं है, अपना दुलार कभी दिखाता नहीं है। तुम उसे सख्त समझते हो लेकिन, तुम पर वह जान लूटाता है पर बताता नहीं है। कर दिए हैं कुर्बान उसने सारे अरमान, ताकि मुन्ना उसका आगे बढ़े और बढ़े मुन्ने की शान। ऐ दुलारो तुम्हारी खुशियों के लिए, उसने नीलाम कर दी हैं अपनी सारी चाहते। कभी तुमने सोचा है उसकी भी हुआ करती थी कुछ हसरतें, अपनी उन्हें हसरतों को दफनाकर, वह तुम्हारे लिए खुशियों के ख्वाब देखता है। तुम उसे सख्त समझते हो लेकिन, तुम पर वह जान लूटाता है पर बताता नहीं है। पिता है वह कभी प्यार जताता नहीं है।।