Rambriksh Bahadurpuri 30 Jun 2026 कविताएँ धार्मिक #पंचामृत पर रचना#रामवृक्ष बहादुरपुरी की पंचामृत पर कविता 5621 1 5 Hindi :: हिंदी
॥ पावन पंचामृत ॥ क्षीर-सिंधु सा सुश्वेत, दूध पावनता का हेतु, भक्ति का बढ़ाता सेतु, आत्म-तृप्ति-दाता है। दही की सुघड़ता से, जीवन में स्थिरता आए, चित्त को प्रफुल्लित करे, सुख उपजाता है॥ घृत की सुवास जैसे, तेज का प्रकाश फैला, बुद्धि-बल-वर्धक जो, ओज को बढ़ाता है। मधु की मधुरता से, वाणी में मिठास घोले, जीवन का कटु-रस, पल में मिटाता है॥ शर्करा मिलाए रस, आनंद अखंड देवे, पंच तत्व मिल के, 'अमृत' कहाता है। चरणों में देव के, जो अर्पित हो जाए भव्य, 'पंचामृत' वही भाग्य, जीव का जगाता है॥
1 week ago
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...