रघुवीर सिंह पंवार 22 Jul 2024 कविताएँ हास्य-व्यंग ऑफिस के किस्से हास्य कविता 37366 0 Hindi :: हिंदी
(ऑफिस के किस्से ) हास्य कविता ऑफिस में हम गए थे बड़े शान से, सोचा था कि बुढ़ापा कटेगा आराम से। पहला दिन जब पहुँचे हम वहाँ, बॉस ने दे दिया काम का पहाड़ सारा। कॉफी मशीन की लाइन में खड़े हुए, सोचा, जल्दी से पी लेंगे, पर क्यों खड़े हुए? सहकर्मी आते गए, गपशप में लगे रहे, हमारी बारी आई, तो कॉफी खत्म हो गई भई। कम्प्यूटर पर बैठे, काम करने की ठानी, माउस ने ही हड़ताल कर दी, ये कैसी परेशानी? फाइलें ढूँढते-ढूँढते, दिन हो गया शाम, ऑफिस के काम में, बस उलझ गया नाम। लंच ब्रेक में निकले, थोड़ी राहत पाने, पर टिफिन बॉक्स खुला, तो दिखी खाली थाली खाने। ऑफिस के व्हाट्सएप ग्रुप में, मैसेज आते रहे, बिना मतलब के जोक्स और मीम्स भेजते रहे। मीटिंग में गए, प्रेजेंटेशन की बारी आई, पर प्रोजेक्टर ने काम करना ही बंद कर दिया भाई। ऑफिस के ये किस्से, हर दिन कुछ नया लाते हैं, कभी हंसी, कभी गुस्सा, पर काम कराते हैं। सोचा था आराम, पर मिली बस भाग-दौड़, ऑफिस के किस्से हैं, रोज़ की एक नई दौड़। सपनों में देखे थे, जो हमने नज़ारे, ऑफिस में हकीकत बन गए सारे। हंसते-हंसते काम करते हैं, यही हमारी पहचान, ऑफिस के किस्सों में, हम सभी महान!