Raj Ashok 07 Apr 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत 40956 1 5 Hindi :: हिंदी
नाम नहीं है। यहाँ कोई मुकाम से पहले , चाहत कि हर जगं मे , दिवानो कि हर फरमाईस पे मेरे दिल को लोगों ने बहुत आजमाया है। जख्म तो देख मेरे तेरे जख्मो से कितने अलग है। यो झूठी मुस्कानो से मेरे जख्मो का हिसाब न कर मुहोबत की बादशाहत चाही थी। हमने भी पर जब ,तेरे दिल मे उतर के देखा। अम्बार लगा था। दिवानो फिर हम भीड़ मे क्या करते हमने तो अपना रास्ता ही बदल लिया। हार गया। आखिर मे तकदीर बनाने वाला भी। ओर क्या लिखता, मेरे नशीब मे उसने तेरा नाम मिटा दिया।