Ujjwal Kumar 08 Nov 2023 कविताएँ समाजिक मेरी पहली कमाई new Poem writer Ujjwal Kumar 35337 0 Hindi :: हिंदी
घर के देख हालातों को खुद से ही मैं रूठ गया हूँ ज़िम्मेदारीयों का बोझ लिए आज कमाने निकल गया हूँ। पसीने से कपड़े हैं लतपत हाथों पर मेहनत के छाले दिन चढ़ गया दिल फिर भी कहता है थोड़ा सा बस और कमाले छिप गया रवि संध्या की गोद में चाँद की अब है बारी आई चला मैं भी थका हारा घर को लेकर अपनी पहली कमाई सौंप दिये जब पैसे माँ को चेहरे पे उनकी मिठी मुस्कान आई सुकुन मिला ये दिल को मेरे कि यही है मेरी पहली कमाई।। रचनाकार-उज्ज्वल कुमार🙏....