Ashok Kumar Yadav 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक 104607 0 Hindi :: हिंदी
कविता- मेरे बचपन की यादें मेरे बचपन की यादों को, मैं फिर से याद करता हूं। कुछ को भूल बैठा हूं, कुछ को फिर याद करता हूं।। अपनी मां की गोद में सोया, मां की गोद में जागा। कभी चलता था घुटनों के बल, कभी दौड़ के भागा।। बैठकर पिता के कंधे में, बहुत दूर गांव जाता था। रंग-रंग के लेते थे मिठाई, सबको खूब खाता था।। भाई-बहनों से कर झगड़े, मैं फिर उनसे बात करता हूं। मेरे बचपन की यादों को, मैं फिर से याद करता हूं।। देख कर सभी बच्चों को, साथ में पाठशाला जाता था। पढ़ता था ए,बी,सी,डी,जेड, अ अनार सीख जाता था।। खेलते थे बाटी,भौंरे हम, सखा संग गांव की गलियों में। खेत से करते चने की चोरी, खाते पीपल की डालियों में।। नहाती थी तालाब में छोरियां, मैं उनके संग नहाता हूं। मेरे बचपन की यादों को, मैं फिर से याद करता हूं।। गांव में लाते थे टेलीविजन, हीरो बन देखने जाता था। दोस्तों संग करता था लड़ाई, कराटे मार के आता था।। हीरोइन ढूंढ लिया मैंने, करते थे हम प्यार की बातें। कभी रूठना, कभी मनाना, कभी कस्में, कभी वादे।। वह दूर हो गई मुझसे, मैं अब भी प्रेम गीत गाता हूं। मेरे बचपन की यादों को, मैं फिर से याद करता हूं।। कवि- अशोक कुमार यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़ भारत।