Ramesh prajapat 20 Jan 2025 कविताएँ समाजिक मुछो की शान 27568 0 Hindi :: हिंदी
गढ़ की मान बचावन की खातिर, सिर कटा लेगा देश को वीर, अंगारों पर भी हसते हसते चल लेगा, मारे गढ़ री तो एक ही शान | मुछ नहीं रखी मर्द कैसा, यह ही तो मारो अभिमान, मुछो के ताव से काँपते फिंरगी, तलवार से धारदार मारे मुछो को ताव, यह मारे गढ़ री तो एक ही शान |