संदीप कुमार सिंह 27 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह चार पंक्ति की कविता आप को बता रही है की दोस्ती थोड़ा सोच-समझ कर करें. जिस से आप को मक्कारी नहीं मिलेगी. 648 0 Hindi :: हिंदी
मक्कारों की दोस्ती से डरता हूं। इस दुनिया से विशेष प्यार करता हूं। शरीफों की दोस्ती मुझे है भाती-- ऐसे हौसला से आगे बढ़ता हूं।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....