Kirti singh 12 May 2023 कविताएँ अन्य मां तेरे लिए लिखूं कितना मैं तुझे जितना समझती हूं। तू उससे आगे बढ़ जाती है 15343 0 Hindi :: हिंदी
**मां तेरे लिए लिखूं क्या मैं जितना समझती हूं तुझे तू उससे आगे निकल जाती है ।**तेरी ममता की दास्तां कुछ टुकड़ों में समझ पाई हूं तभी तुझे पन्नों पर लिखने की कोशिश कर पाई हूं। मां तुम मेरी वह भगवान हो जो भगवान के दर पर जाकर मेरे हिस्से का दुख अपने हिस्से में मांगती है और हजार बार मर कर भी मुझे एक जीवन देने की चाह रखती हो ।*****मां तेरे लिए लिखूं क्या मैं जितना समझती हूं तुझे तू उससे आगे निकल जाती है **पीठ पर जख्मों का वार लिए आंखों में मेरे लिए प्यार लिए ना जाने कितनी लोरियां सुना कर मुझे सुलाती हो ।**मां तेरे लिए लिखूं क्या मैं जितना समझती हूं तुझे तू उससे आगे बढ़ जाती है।** मां तेरी ममता मुझे तो क्या मां शब्द को भी एक बड़ा वजूद दे जाती है। मां तेरी ममता का एहसास मां शब्द के मीठे स्वरों से उन अनाथो को भी हो जाती है जिनके पास मां नहीं होती। Kirti singh