Meenubaliyan 17 Jan 2025 कविताएँ अन्य 29845 0 Hindi :: हिंदी
मेरी मां के चेहरे पर जो ये ढलती हुई निशानी हैं, ये झुर्रियां मेरे घर की सारी कहानी हैं, कभी पापा का गुस्सा इनमें, कभी दादी की डाट हैं इनमें, कही मिली बुआ की मुस्कुराहट हैं ये, कही अनकही बाते हैं इनमें, हर घर में बसने वाली मेहरबानी हैं, ये झुर्रियां मेरे घर की सारी कहानी हैं अपनी खुशी बच्चों पे लुटाती हैं, मां हमें हर मुसीबत से बचाती हैं, बस अपनी खुशियां नहीं जताती हैं, इन झुर्रियो में थोड़ी सी हमारी भी शैतानी है, ये झुर्रियां मेरे घर की सारी कहानी हैं।।।
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