Anilkumar Rathwa (Sameer) 15 Oct 2025 कविताएँ समाजिक “माँ-बाप का उत्तर” 16607 0 Hindi :: हिंदी
आज का युग अजीब सवाल पूछता है, बेटा कहता है — “आपने मेरे लिए क्या किया?” और माँ-बाप चुप हो जाते हैं, क्योंकि उनका उत्तर शब्दों में नहीं, बल्कि बलिदानों में होता है। जब तू छोटा था, तू रोता था, माँ पूरी रात तेरे सिरहाने बैठती थी, तेरी एक मुस्कान के लिए, वो अपनी नींद कुर्बान करती थी। पिता दिन भर धूप में जलते थे, तेरे स्कूल की फीस के लिए, तेरे जूतों की जगह, उन्होंने खुद नंगे पाँव रास्ते तय किए। जिस खिलौने से तू खेला था, वो पिता ने अपनी जेब काटकर खरीदा था, और जिस दूध में तू पलता गया, वो माँ ने अपनी सेहत से निकाला था। अब तू बड़ा हुआ, तेरा अभिमान भी बढ़ा, दुनिया की बातें, तेरी सोच में चढ़ा। तू कहता है — “आपने किया ही क्या मेरे लिए?” माँ मुस्कुराती है, कहती है — “तेरे लिए जीना ही भूल गए थे हम।” तेरे हर कदम के पीछे उनका आशीर्वाद है, तेरी हर जीत में उनकी नींदों की बात है। तेरी ऊँचाइयों में उनकी झुकी कमरें हैं, तेरे सुख में उनकी सूनी नजरें हैं। ओ युवा, सवाल मत कर, गिनती नहीं होती ममता की। जो सिर पर हाथ रख दे, वो भगवान से भी ऊँचा होता माँ-बाप की। कभी रुक कर देखो, उनकी आँखों की झुर्रियों में तेरी कहानी छिपी है, उनके काँपते हाथों में तेरी जवानी की लकीरें लिखी हैं। माँ-बाप ने जो किया, वो दिखाने लायक नहीं, क्योंकि वो इज़्ज़त से नहीं, इबादत से किया गया है। तो अगली बार अगर सवाल उठे मन में — “आपने मेरे लिए क्या किया?” तो आईने में देखना, तेरी हर साँस, हर पहचान, उसी के उत्तर हैं — “हमने तुझे बनाया है बेटा।”