Rajnish khandal 20 Feb 2025 कविताएँ धार्मिक #ram #kevat #ramayan #sanskriti #bhagti #kavita 26738 0 Hindi :: हिंदी
गंगा पार की बारी आई तो,
राम के प्रेम को पा गया केवट।
आज्ञा से पहले बखान सुनो प्रभु,
तोरे चरण प्रताप को जानत केवट।
त्व चरण प्रताप से शीला भई नारी,
नाव है मौरी तो काठ की रघुवर।
चरणन को मै पहले धौहुहो,
फिर चढ़हो तुम नाव हो रघुवर।
दर्शन मात्र से बैकुण्ठ मिले जिनके,
चरणो का अमृत पी गया केवट ।
लक्ष्मण देखत सोचत - सोचत,
भाग्य का भाग्य जगा गया केवट।
जोहू अवसर मोहू मिला ना अब तक,
पल में अवसर पा गया केवट ।।
रचनाकार = रजनीश खाण्डल