Santosh kumar koli ' अकेला' 11 Jul 2024 कविताएँ समाजिक कर्म प्रभाव 47244 0 Hindi :: हिंदी
विचारों की सांसों में, मधुर समां समाने दो। मधुर बयार संतृप्त, विचारधारा बहाने दो। शुद्धता समवेत विचारों को, रश्मियाँ फैलाने दो। अमृतमय रश्मियों से, भंगुर भुवन को नहाने दो। विचार जनित है कर्म, यह मर्म समझाने दो। कर्म जनित है जग, यह जनी बतलाने दो। रश्क विचारित संवहन को, झंवाने दो। पूत कर्म धर्म से, जग जन्नत बनाने दो। कर्म चरखी़ से निकलता चर, यह बतलाने दो। घट तार कर झंकृत, नई झंकार सुनाने दो। कर्म धुरी पर धरी धरा, यह मिसाल समझाने दो। यहीं करनीयहीं भरनी, किए हुए घर दिखलाने दो।