हुकम चन्द जैन 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक कर्म का महत्व 88127 0 Hindi :: हिंदी
साक्ष्य नहीं चाहिए दीप की ज्योति को आब नहीं चाहिए सीप के मोती को अग्रसर होने को कर्म ही प्रेरक है भाग्य नहीं चाहिए श्रम की रोटी को|| भाग्य पर आश्रित तो सबसे निर्बल है भाग्यहीन के लिए कर्म ही संबल है कर्म तो मनुष्य की आत्मा का दान है दान को अंजुलि में लेकर बढ़ चलो राह नहीं चाहिए किसी कर्म योगी को साक्ष्य नहीं चाहिए दीप की ज्योति को|| ऐश्वर्य दास हो तो वासना को त्याग दो कामना करो नहीं आत्मा को मान दो स्वाभिमान ही सदा आधार होना चाहिए आत्मज्ञान से स्वयं जीवन संवार लो जीवन का मर्म स्वयं जान जाओगे तथ्य नहीं चाहिए धर्म के रोगी को साक्ष्य नहीं चाहिए दीप की ज्योति को||
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