मोती लाल साहु 11 May 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत #अध्यात्म#गुरु_महिमा#आत्मज्ञान#जीवन्मुक्ति#भक्ति_साहित्य#SpiritualAwakening#SelfRealization#Spirituality#InnerPeace#DivineWisdom#Enlightenment 9471 0 Hindi :: हिंदी
समय के महापुरुष की शरण में, जब शीश झुक जाता है। समर्पण की पावन समिधा से, सेवा का दीप जलता है।। श्रवण कर उनके वचनों को, मन का तिमिर छँटता है। श्रद्धा और सबुरी से ही, शिष्य का भाग्य सजता है।। जब बोध जागृत होता है, और गुरु होते प्रसन्न। विनयपूर्ण प्रार्थना से तब, मिलता है ज्ञान-रत्न।। करुणा की वृष्टि होती है, गुरु जब हाथ धरते हैं। शब्दों के उस पार का, वो दिव्य दान करते हैं।। अभ्यास की अग्नि में तपकर, जो निज स्वरूप को जान गया। मिटाकर अहं का परदा, वो स्वयं ही ब्रह्म मान गया।। आत्मज्ञान की उस ज्योति से, हर बंधन टूट जाता है। जीते जी वो राही, 'परम सत्ता' में मिल जाता है।। न काल का भय रहता है, न मृत्यु का कोई घेरा। गुरु कृपा से हो जाता है, शाश्वत मुक्ति का सवेरा।। -मोती