महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक 107768 0 Hindi :: हिंदी
जिंदगी तेरे रंग हजार कभी पतझड़, तो कभी बहार कभी प्यार, कभी इंतजार कभी खुशियों की बरसात कभी गमों की अंधेरी रात कभी बचपन में घुटनों के बल चलने की यादें कभी बड़े होने की आपस में बातें वो स्कूल का बस्ता और किताबें बच्चों से झगड़ना और स्कूल से बिछड़ना याद है वही स्कूल के सामने का छोटा सा बाजार, ...वाह जिंदगी तेरे रंग हजार ll मम्मी की डांटे पापा के चांटे खा खाकर बड़ा होना और धीरे-धीरे खुद के पैरों पे खड़ा होना फिर वो दफ़्तर की चाय और घर का खाना जिम्मेदारियों का सर पे आना शादी के बंधन में बंध जाना और जवानी का हाथों से फिसल जाना फिर बनना एक नया परिवार, ..वाह... जिंदगी तेरे रंग हजार ll बुढ़ापे की दस्तक माथे की झुर्रियां अब खुद के ही बच्चों से बढ़ती दूरियां और शुरू होती नई मजबूरियां अब तो बस हालत का मारा जिंदगी से हारा कुछ दिन तक बस पेंशन का सहारा और आखिर में अल्लाह को प्यारा बस यहीं पर होता है अंतिम संस्कार ..वाह.... जिंदगी तेरे रंग हजार ll