Gopal krishna shukla 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #motivation 45357 0 Hindi :: हिंदी
उड़ चले पर्वत वह भी,
जिनके पास ज़मीन थी l
हर कश्क खत्म,
अश्क में नयन नमl
जीना दुर्लभ है नहीं l
बिन पीर के युद्ध क्या l
मल्ल युद्ध है जिंदगी,
और जिंदगी में शुद्ध क्या ll
जिंदगी ना गर्म ग्रीष्म
है ठिठुरती सर्द ही ll
गोपाल कृष्ण शुक्ला