Preksha Tripathi 24 Jun 2023 कविताएँ दुःखद Breakup 15685 1 5 Hindi :: हिंदी
मेरी पूरी ज़िंदगी बदल के रख दिये। महोदय ने उसमें कदम जो रख दिये।। अकेले थे हम पहले मस्त ज़िंदगी। कट रही थी मेरी थी न कोई बेखुदी।। आ गए थे यूँ वो कहने के वास्ते। बाँटता हूँ आज से मैं दुःख के रास्ते।। अपनी मीठी बातों से वो मुझसे छल किये। मेरी समस्याओं का न कोई हल दिये।। हर समय की भावना को साझा तो किये। हम भी उनको अपना सहारा बना लिए। क्या कहूँ मैं और हमें क्या ही वो दिये। खुद को मेरी आदत बना के चल दिये।। प्रेक्षा त्रिपाठी प्रतापगढ़ उत्तरप्रदेश
3 years ago