संदीप कुमार सिंह 09 Sep 2026 कविताएँ समाजिक #साहित्य #कविता #गीत #ग़ज़ल #पढ़ना बहुत जरूरी है #साहित्य समाज का दर्पण होता है 3282 0 Hindi :: हिंदी
दोहा--छंद जैसी होगी भावना,वैसा मिलता ज्ञान। भव्य ज्ञान की जोत से,धरा लगे उद्यान।। जैसी होगी भावना,वैसा ही हो काम। दिव्य भाव से जग चले,सुखी रहे आवाम।। जैसी होगी भावना,वैसा हो परिणाम। हंसते रहिए सब सदा,पिएं भक्ति का जाम।। जैसी होगी भावना,वैसा हो सम्मान। कर्म उसी अनुकूल हो,रखिए इसका ध्यान।। जैसी होगी भावना,वैसी हो पहचान। एक भव्य पहचान से,पूरे हो अरमान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....