Suraj pandit 20 May 2023 कविताएँ बाल-साहित्य Childhood 18012 0 Hindi :: हिंदी
जब हम बच्चे थे।
वह कुछ पल अपनें थे।
खेला करतें थे सीढ़ियों में,
यादो के कुछ पन्ने अपने थे।
कहीं शरारत थी
तो कहीं प्यार
कहीं मस्ती थीं तो
कहीं यारों का यार
कागज कि नाव कहीं
तैर रहीं थीं तो
कहीं उसमे लिपटे यादों के दास्तान
उस पल चॉकलेट कि मिठास थीं
तो उस पल दूध भात का स्वाद
जब हम सब बच्चे थे
वह कुछ पल अपने थे।
काश वह पल में जा पता
कुछ खुशियाँ ला पता
वें दास्तान थीं जों बच्चपन के
काश वह कहीं बैठे देखा पता।
--------------- सूरज पंडित