Shiwani vishwakarma 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक वक्त 33961 0 Hindi :: हिंदी
जाने क्यों कुरेधती हैं मन की मलाल, जो बीत गया हैं दौर , जाने वो कौन सा दिन होगा, जिसमें भूल जाए वो दौर, आसान नहीं पर नामुमकिन भी नहीं, थोड़ा सा वक्त और सही।
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