Rupesh Singh Lostom 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक हौशलों में हौशला भर 33341 0 Hindi :: हिंदी
क्या खाख मजा हैं जीने में जब डर भरा हो सिने में डर को डरा कर देख देख क्या मजा हैं जीने में गहराई नापना हैं तो समंदर में उतर के देख साहिल पे खड़े हो के गहराई नहीं नापा करते किनारे पे तैर के समंदर पार नहीं होगा उस पार जाना हैं तो लहरों पे तैर ना होगा तट अक्सर तोड़ देता हैं हौशला हौशलों में हौशला भर और कूद जा सिंधु में अगर मरना ही हैं तो महासागर तैर के मर पार हुआ तो फिर विजेता विश्वविजेता कहलायेगा