Manasvi sadarangani 05 Sep 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत Mere papa 16701 0 Hindi :: हिंदी
बिना कहे मेरी हर बात को वो समझ जाते थे,
दिखाते नही कभी,
पर मेरी परवाह खुद से ज्यादा वो कर जाते थे।
कहते थे,हर बार स्ट्रांग तुम बनो,
लेकिन हर बार गिरने पर हाथ वही थमाते थे।
हर बार कहते थे,पैसा कमा कर तो देखो,
पर वही हर बार मेरे पर्स में पैसे रख कर जाते थे।
मुझे कोई परेशानी छू भी ना सके,
ऐसा उनका साया था,
मेरी चोट पर दवा का हाथ भी उन्होंने ही छुआया था।
जब कह देती थी गुस्से में,
आपने हमारे लिए किया ही क्या है,
तब भी कभी एहसास न दिलाया था,
आज जब काबिल बनी तब समझ आया है,
मेरे अंदर मैं नहीं, सब कुछ उनका ही समाया है।
पापा अब आप नही,
पर आप की हर सिख साथ चलती है,
इसलिए तो आपकी बेटी कही भी नही गिरती,
हर जगह संभलती है।
श्रीमती मनस्वी सदारंगानी