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हमारे अंदर कितनी है बुराइयां जब लोग तय करते हैं - कटु सत्य

Kirti singh 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक हमारे अंदर कितनी है बुराइयां जब लोग तय करते हैं 107695 0 Hindi :: हिंदी

जब हम गरीब होते हैं तो हमारे अंदर लोग लाख बुराइयां गिनाते हैं और 
जब हम अमीर हो जाते हैं तब लोग गिनती भूल जाते हैं
 और हमें सीधा महात्मा बुध बना देते हैं. Kirti singh

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